पज्ज्वन राय कछवाह का इतिहास
महापराक्रमी पज्जवनराय - आम्बेर के कछवाहा राजाओं में आगे चलकर महापराक्रमी पज्जवनराय (प्रद्यम्नराय) हुए। इनकाविवाह वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान के काका कान्हा की पुत्री से हुआ था । बारहवीं शताब्दी में उन...
View Articleखंगारोत कछवाहों के साखूण ठिकाने का इतिहास
राजस्थान का इतिहास शौर्य, त्याग और स्वामिभक्ति की गाथाओं से भरा पड़ा है। जयपुर (आमेर) राज्य के अंतर्गत आने वाले जागीरी ठिकानों में साखूण ठिकानाअपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रखता है। खंगारोत...
View Articleखंगारोत कछवाहों के बिचूण ठिकाने का इतिहास
खंगारोतों का यह संस्थान जयपुर अजमेर राजमार्ग पर बगरू महलां व दूदू के बीच मुख्य सड़क से लगभग 2 कि.मी. पर अवस्थित है। श्यामसिंह के छोटे पुत्र बुधसिंह को भाई बंट में बिचूण की जागीर मिली थी। विक्रम संवत्...
View Articleदाहिमा राजवंश का इतिहास। कौन थे दाहिमा क्षत्रिय ?
दाहिमागोत्र- गार्गेय, वेद-यजुर्वेद, सूत्र - पारस्कर गृह्यसूत्र, प्रवर- पौलस्त्य, विश्वश्रवस, दंभोली, शाखा - वाजसनेयी, माध्यन्दिनी, कुलदेवी - दधिमति माताजोधपुर ( मारवाड़) में नागौर इलाके में गोठ और...
View Articleपृथ्वी तारा : इतिहास की एक अनसुनी रोचक गाथा
महाराणा रायमल ने 50000 रुपये वार्षिक आय का भेंसरोड़ का परगना राणा मोकल के पोते सूरजमल को जागीर में दिया। राजकुमार पृथ्वीराज किसी पुराने विवाद को लेकर सूरजमल जी से नाराज था अत: उन्होंने सूरजमल जी को...
View Articleराणा सांगा के बड़े भाई पृथ्वीराज की अनसुनी कहानी
मेवाड़ के महाराणा रायमल जी के 14 पुत्रों में ज्येष्ठ थे राजकुमार पृथ्वीराज, जो संग्राम सिंह यानी राणा सांगा के बड़े भाई थे | राजकुमार पृथ्वीराज ने 14 वर्ष की आयु में ही अपनी वीरता प्रदर्शित कर देशभर में...
View Articleउड़ना राजकुमार पृथ्वीराज और तारा सोलंकी
अल्लाउदीन खिलजी द्वारा निष्काषित करने के बाद अन्हलवाड़ा के प्रसिद्ध बलहरा राजवंश के सोलंकी मध्य भारत में आ गए और उन्होंने टोंक, टोडा और बनास के आस-पास की धरती पर अधिकार कर लिया | इसी वंश में एक सुरतान...
View ArticleKalakh Fort Near Jaipur कालख किले का इतिहास
जयपुर जिले में जोबनेर से लगभग 7 कि.मी. पहले कालख का किला विद्यमान है। जयपुर रियासत के अन्तर्गत कालख कछवाहों की खंगारोत शाखा का ताजीमी ठिकाना था । कालख के खंगारोत नरायणा के पराक्रमी शासक तथा मुगल...
View ArticleHistory of Karkeri Fort : करकेड़ी किले का इतिहास
History of Karkeri Fort : करकेड़ी का किला एक पहाड़ी बना है, जो किशनगढ़ से लगभग 33 किलोमीटर दूर परबतसर पुष्कर मार्ग पर स्थित है। यह किला कब बना, किसने बनाया यह शोध का विषय है, हमें डॉ. अविनाश पारिक द्वारा...
View Articleसिर कटने के बाद भी लड़े थे कुंवर सुखसिंह मेड़तिया, आज भी पूजते है लोग
आप जो ये चित्र देख रहे हैं वो रियासती काल में अपने देश, धर्म और संस्कृति के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले एक योद्धा का स्मारक है | आज इस महान योद्धा को सम्मान देने, पूजा अर्चना करने और उनका अभिषेक...
View Articleराजा मानसिंह और जुगतीदान जी चारण की सच्ची कहानी
जोधपुर के महाराजा विजय सिंह जी के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर काफी घमासान हुआ, परिवार के सदस्य एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए, दरबारी राज में अपनी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए षड्यंत्र रचने लगे,...
View Articleकौन होते हैं जाटू तोमर, तंवर ? कैसे हुई जाटू तंवरों की उत्पत्ति ?
आज के इस लेख में हम बात करेंगे जाटू तोमरों की यानी जाटू तंवरों की - तो सबसे पहले हम बात करते हैं कि आखिर तोमर या तंवर है कौन ? इतिहासकार इनकी उत्पत्ति को लेकर क्या लिखते हैं ? तंवर राजवंश का राजनैतिक...
View Articleएक ताना बना पूरे राज्य के विनाश का कारण | बड़गूजर राजवंश का दर्दनाक इतिहास
"ताने मारना व्यक्ति के स्वभाव में है पर कई बार छोटे छोटे तानों का व्यक्ति के जीवन पर व्यापक असर हो जाता है। इतिहास में ताने मारने की घटनाएं नए राज्यों की स्थापना और स्थापित राज्यों के खात्मे की वजह...
View Articleबड़गूजर राजवंश का इतिहास : History of Badgujar Rajvansh
कछावा राजवंशके लेख में हमने बताया था कि दुल्हेराय जी कछावा ने मध्यप्रदेश से आकर दौसा के बड़गूजरों को हराकर राजस्थान में कछावा राज्य की नींव डाली थी अत : हमें यह भी जानना चाहिए कि बड़गूजर राजवंश कौन है,...
View Articleबड़गूजर राजवंश का इतिहास : History of Badgujar Rajvansh
"बड़गूजर सूर्यवंशी क्षत्रिय। इनका गौत्र वशिष्ठ तथा प्रवर वशिष्ठ, अत्रि और सांकृति है। वेद यजुर्वेद, शाखा - वाजसनयी, सूत्र - पारस्कर, गृह्यसूत्र, कुलदेवी - कालिकाजी और ईष्टदेव लक्ष्मण जी है। इस वंश के...
View Articleआमेर के राजा सवाई जयसिंह का मुग़लों के साथ संघर्ष
21 फरवरी 1707 को मुग़ल बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद मुगलिया परम्परा के अनुरूप उसके पुत्रों में उत्तराधिकार के लिए खुनी संघर्ष शुरू हो गया। इस संघर्ष में किसी एक को जीतकर मुगलिया...
View Articleदांगी कछावा राजवंश का इतिहास। डांगी कछवाहों का इतिहास
आज के इस लेख में हम आपको जानकारी देंगे कछावा राजवंश की दांगी शाखा के गौरवशाली इतिहास की। आपको बता दें दांगी या डांगी सरनेम आपको कई जातियों में मिल जायेंगे पर हम जो जानकारी देने जा रहें हैं वह कछावा...
View Articleआमेर नरेश कांकिलदेव कछवाह और मीणा संघर्ष
दुल्हेराय कछवाह मध्यप्रदेश से आये और राजस्थान में उन्होंने दौसा, मांच, खोह आदि जीत कर अपना राज्य स्थापित किया | जयपुर राज्य के संक्षिप्त इतिहास पुस्तक के लेखक ठाकुर फतेहसिंह नायला ने लिखा है कि ३०...
View ArticleBrief History of Meena Kingdoms ढूंढाड़ के मीणा राज्यों का संक्षिप्त इतिहास
Brief History of Meena Kingdoms : राजस्थान में कछवाह राजवंश के आगमन को लेकर हमने जितने वीडियो बनाये, उन पर आये कमेंट्स पढने के बाद हमें महसूस हुआ कि ढूंढाड़ क्षेत्र में मीणाओं के राज्य होने की बात कईयों...
View ArticleChanda Meena State of Khoh खोह का चांदा मीणा राज्य
खोह का चांदा राज्य वर्तमान जयपुर से दक्षिण दिशा में लगभग पांच मील दुरी पर पहाड़ों से सटी हुई "खोह" नामक प्राचीन बस्ती है | परकोटों से घिरी हुई तथा महलों, मंदिरों, बावड़ियों और पक्के राजमार्गों से युक्त...
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