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Channel: ज्ञान दर्पण
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महाराजा बहादुर सिंह जी किशनगढ़ और महादजी सिंधिया

 किशनगढ़ रियासत के महाराजा बहादुर सिंह जी एक ऐसे प्रतापी और बुद्धिमान शासक थे,  जिनका इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है –  इनका शासनकाल न केवल कूटनीति और चतुराई से भरा था, बल्कि कला, साहित्य और...

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History of Fatehpur फतेहपुर का इतिहास

राजस्थान के इतिहास में कायमखानी नवाबों का नाम वीरता, शौर्य और सैन्य पराक्रम के लिए जाना जाता है। सीकर जिले के फतेहपुर नगर पर लगभग तीन शताब्दियों तक कायमखानी शासकों का अधिकार रहा। लेकिन फिर इतिहास ने...

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जोधा राठौडों के बड़ली ठिकाने का इतिहास

राजस्थान की धरती पर ऐसे अनेक ठिकाने हैं, जिनकी हवेलियों और किलेनुमा इमारतों के पीछे सदियों पुरानी शौर्यगाथाएँ और गौरवशाली इतिहास छुपा है। लेकिन अजमेर-मेरवाड़ा की धरती पर बसा **बड़ली ठिकाना** केवल एक...

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जब एक भाई ने दूसरे भाई के यहाँ डाका डाला और फिर जो हुआ

शेखावाटी के के चौकड़ी ठिकाने के ठाकुर गोपाल सिंह जी अपने जमाने के तगड़े सामंत थे । चौकड़ी ठिकाना झुंझुनू पर राज कायम करने वाले शार्दूल सिंह जी शेखावत की वंश परंपरा से है । इस ठिकाने की स्थापना जोरावर सिंह...

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पवित्र पर्व : पुष्कर की पवित्रता हेतु हुआ युद्ध

 संवत् 1737 विक्रमी के भाद्रपद मास की कृष्ण सप्तमी का दोपहर ढल चुका था । बादलों की शीतल छाया के नींचे आलनियावास की नदी में कुँवर राजसिंह सिर पर मोड़ बाँधे दूल्हा के भेष में घोड़ी पर सवार होकर देवपूजन...

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पीपल्या ठिकाना : शक्तावतों का अनसुना इतिहास

पीपल्या के सरदार महाराणा उदयसिंह (द्वितीय) के पुत्र महाराज शक्तिसिंह के १३ वें पुत्र राजसिंह के दूसरे बेटे कल्याणसिंह के वंशज हैं और 'रावत' उनकी उपाधि है ।महाराणा अमरसिंह ( प्रथम ) के समय इस ठिकाने पर...

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पज्ज्वन राय कछवाह का इतिहास

 महापराक्रमी पज्जवनराय - आम्बेर के कछवाहा राजाओं में आगे चलकर महापराक्रमी पज्जवनराय (प्रद्यम्नराय) हुए। इनकाविवाह वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान के काका कान्हा की पुत्री से हुआ था । बारहवीं शताब्दी में उन...

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खंगारोत कछवाहों के साखूण ठिकाने का इतिहास

 राजस्थान का इतिहास शौर्य, त्याग और स्वामिभक्ति की गाथाओं से भरा पड़ा है। जयपुर (आमेर) राज्य के अंतर्गत आने वाले जागीरी ठिकानों में साखूण ठिकानाअपना एक विशिष्ट ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रखता है। खंगारोत...

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खंगारोत कछवाहों के बिचूण ठिकाने का इतिहास

खंगारोतों का यह संस्थान जयपुर अजमेर राजमार्ग पर बगरू महलां व दूदू के बीच मुख्य सड़क से लगभग 2 कि.मी. पर अवस्थित है। श्यामसिंह के छोटे पुत्र बुधसिंह को भाई बंट में बिचूण की जागीर मिली थी। विक्रम संवत्...

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दाहिमा राजवंश का इतिहास। कौन थे दाहिमा क्षत्रिय ?

 दाहिमागोत्र- गार्गेय, वेद-यजुर्वेद, सूत्र - पारस्कर गृह्यसूत्र, प्रवर- पौलस्त्य, विश्वश्रवस, दंभोली, शाखा - वाजसनेयी, माध्यन्दिनी, कुलदेवी - दधिमति माताजोधपुर ( मारवाड़) में नागौर इलाके में गोठ और...

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पृथ्वी तारा : इतिहास की एक अनसुनी रोचक गाथा

 महाराणा रायमल ने 50000 रुपये वार्षिक आय का भेंसरोड़ का परगना राणा मोकल के पोते सूरजमल को जागीर में दिया। राजकुमार पृथ्वीराज किसी पुराने विवाद को लेकर सूरजमल जी से नाराज था अत: उन्होंने सूरजमल जी को...

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राणा सांगा के बड़े भाई पृथ्वीराज की अनसुनी कहानी

 मेवाड़ के महाराणा रायमल जी के 14 पुत्रों में ज्येष्ठ थे राजकुमार पृथ्वीराज, जो संग्राम सिंह यानी राणा सांगा के बड़े भाई थे | राजकुमार पृथ्वीराज ने 14 वर्ष की आयु में ही अपनी वीरता प्रदर्शित कर देशभर में...

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उड़ना राजकुमार पृथ्वीराज और तारा सोलंकी

अल्लाउदीन खिलजी द्वारा निष्काषित करने के बाद अन्हलवाड़ा के प्रसिद्ध बलहरा राजवंश के सोलंकी मध्य भारत में आ गए और उन्होंने टोंक, टोडा और बनास के आस-पास की धरती पर अधिकार कर लिया | इसी वंश में एक सुरतान...

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Kalakh Fort Near Jaipur कालख किले का इतिहास

जयपुर जिले में जोबनेर से लगभग 7 कि.मी. पहले कालख का किला विद्यमान है। जयपुर रियासत के अन्तर्गत कालख कछवाहों की खंगारोत शाखा का ताजीमी ठिकाना था । कालख के खंगारोत नरायणा के पराक्रमी शासक तथा मुगल...

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History of Karkeri Fort : करकेड़ी किले का इतिहास

History of Karkeri Fort : करकेड़ी का किला एक पहाड़ी बना है, जो किशनगढ़ से लगभग 33 किलोमीटर दूर परबतसर पुष्कर मार्ग पर स्थित है। यह किला कब बना, किसने बनाया यह शोध का विषय है, हमें डॉ. अविनाश पारिक द्वारा...

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सिर कटने के बाद भी लड़े थे कुंवर सुखसिंह मेड़तिया, आज भी पूजते है लोग

आप जो ये चित्र देख रहे हैं वो रियासती काल में अपने देश, धर्म और संस्कृति के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले एक योद्धा का स्मारक है | आज इस महान योद्धा को सम्मान देने, पूजा अर्चना करने और उनका अभिषेक...

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राजा मानसिंह और जुगतीदान जी चारण की सच्ची कहानी

जोधपुर के महाराजा विजय सिंह जी के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर काफी घमासान हुआ, परिवार के सदस्य एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए, दरबारी राज में अपनी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए षड्यंत्र रचने लगे,...

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कौन होते हैं जाटू तोमर, तंवर ? कैसे हुई जाटू तंवरों की उत्पत्ति ?

 आज के इस लेख में हम बात करेंगे जाटू तोमरों की यानी जाटू तंवरों की - तो सबसे पहले हम बात करते हैं कि आखिर तोमर या तंवर है कौन ? इतिहासकार इनकी उत्पत्ति को लेकर क्या लिखते हैं ? तंवर राजवंश का राजनैतिक...

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एक ताना बना पूरे राज्य के विनाश का कारण | बड़गूजर राजवंश का दर्दनाक इतिहास

 "ताने मारना व्यक्ति के स्वभाव में है पर कई बार छोटे छोटे तानों का व्यक्ति के जीवन पर व्यापक असर हो जाता है।  इतिहास में ताने मारने की घटनाएं नए राज्यों की स्थापना और स्थापित राज्यों के खात्मे की वजह...

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बड़गूजर राजवंश का इतिहास : History of Badgujar Rajvansh

कछावा राजवंशके लेख में हमने बताया था कि दुल्हेराय जी कछावा ने मध्यप्रदेश से आकर दौसा के बड़गूजरों को हराकर राजस्थान में कछावा राज्य की नींव डाली थी अत : हमें यह भी जानना चाहिए कि बड़गूजर राजवंश कौन है,...

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